विश्व कविता दिवस के अवसर पर भाईचारा सेवा समिति के तत्वावधान में होली मिलन समारोह एवं विराट कवि सम्मेलन

 


सिकन्दराराऊ । विश्व कविता दिवस के अवसर पर भाईचारा सेवा समिति के तत्वावधान में होली मिलन समारोह एवं विराट कवि सम्मेलन  का आयोजन ग्राम नगला हरी सि.राऊ में किया गया। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि बाबा देवी सिंह निडर ने और संचालन कुशल संचालक शायर यासीन आतिश सोलंकी ने किया। 


मुख्य अतिथि के रुप में सिकन्द्राराऊ नायव तहसील सतेन्द्र सिंह शिखरवार एवं कोतवाल सि.राऊ प्रवेश राणा व विशेष अतिथि भाईचारा सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश यादव संघर्षी , राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हरपाल सिंह यादव, राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह, राष्ट्रीय महासचिव जाकिर भारती उपस्थित रहे। कार्यक्रम आयोजक हरीश यादव जिलाध्यक्ष एवं आनंद वर्मा मण्डल उपाध्यक्ष ने सभी अतिथियों, समाजसेवियों एवं कवियों को स्मृति चिन्ह ,शांल एवं फूलमालाओं से सम्मानित किया।

भाईचारा सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश यादव संघर्षी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हरपाल सिंह यादव एवं राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने संयुक्त रूप से सभी देशवासियों को विश्व कविता दिवस की शुभकामनाएँ दीं । 



कार्यक्रम का शुभारंभ शायर अब्दुल कदीर ज़िया की सरस्वती वंदना से हुआ। 


कासगंज से पधारे वरिष्ठ कवि राजवीर सिंह राजू ने पढ़ा-

अंजाम कुछ भी हो पर कुछ करने की जरूरत है 

पैगाम कुछ भी हो पर खत पढ़ने की जरूरत है।।


हास्यकवि पंकज पण्डा ने पढ़ा -

 प्यार के रंग बरसे अबके होली में।

पिया को अखियां तरसे होली मे


एटा से पधारे ओज के कवि संजीव सरगम ने पढ़ा -

मुल्क मैं कोई भूखा न नंगा रहे।

हिन्दू मुस्लिम का कोई न दंगा रहे।


घुमक्कड़ कवि गाफिल स्वामी इगलास ने पढ़ा -

 होली का त्यौहार रंगीलो रंग रंगीली रंग  लगें।

हरे गुलाबी नीले पीले छैल छविले रंग लगें।

 बाबा देवी सिंह निडर हाथरस ने पढ़ा-

होली में गले मिल के हम सभी विद्वेष मिटायेंगे ना करेंगे कोई हुड़दंग सभी विद्वेष मिटायेंगे कवि सत्य प्रकाश शर्मा सत्य पुरदिलनगर ने पढ़ा-

होली के हुरंग रंग भाभी बड़ो जोर करे।

मोये रंग डारिवे कूँ रंगति दिखावती।

जलेसर से पधारे वरिष्ठ कवि अकबर सिंह अकेला ने पढ़ा .

एक ओर खलनायक होली।

एक ओर फलदायक होली।।

कासगंज से पधारे वरिष्ठ शायर कवि यासीन आतिश सोलंकी ने पढ़ा 

करना है तो कमाल कर।

तू उसी वातों को सलाम कर।

शायर अब्दुल कदीर जिया कासगंज ने पढ़ा

गाँव कस्बे शहर का अमन बेच दें।

भृष्ट नेता जो चाहें वतन बेच दें।।

कवयित्री गीता सिंह गीत ने पढ़ा।

भरोसा है हमें एक दिन विरह का अंत आएगा

लिए खुश्बू मोहब्बत की हमारा कन्त आएगा।।

वरिष्ठ कवि विवेकशील राघव जी ने पढ़ा 

वेदनाओं से विरत विस्तार का मैं क्या करूँगा।

जीत का मैं क्या करूँगा हार का मैं क्या करूँगा।

कार्यक्रम में प्रमुख रुप से सर्वेश कुमार यादव,राजन सिंह पूर्व प्रधान, यदुवीर सिंह यादव,शेर सिंह फौजी, कुलवीर सिंह यादव, अरविन्द कुमार हैड कांस्टेबल, विपिन कुमार हैंड कांस्टेबल,वीरेंद्र सिंह, रवेन्द्र यादव लेखपाल, सुखराम,श्याम यादव, राकेश कुमार पाल, सत्यवीर सिंह, विशाल यादव, सत्यप्रकाश यादव पूर्व प्रधान, शशांक वार्ष्णेय,आकाश यादव, अवधेश यादव, राकेश रंजन, सत्यम यादव,अमन यादव, डॉ.जयपाल सिंह,गीतम सिंह,समसुद्दीन खांन आदि लोग उपस्थित रहे।

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