Detective Reporter

The Hindi News Paper & News Service's

एटा के एस.पी क्राइम राहुल कुमार का कोरोना से निधन

 



हमारे सहयोगी अमन पठान की रिपोर्ट:- 

सवाल ये नही टूटा कि बच गया शीशा

सवाल ये है कि पत्थर किधर से आया है
इन पंक्तियों का अर्थ सिर्फ इतना है कि जो लोग कोरोना के कारण असमय काल के गाल में समा चुके हैं उन्हें किसी भी तरह जीवित नही किया जा सकता लेकिन जो जीवित हैं उनके जीवन को बचाया जा सकता है। इसके लिए पुलिस को सख्त होना पड़ेगा। इतना भी सख्त नही कि पुलिस मानवीय संवेदनाओं को ही भूल जाए।
करीब 10 दिन पहले पंचायत चुनाव की व्यवस्था के दौरान कोरोना संक्रमित हुए एटा के SP Crime राहुल कुमार का आज कोरोना से निधन हो गया। राहुल कुमार 2001 बैच के PPS अधिकारी थे और पिछले एक साल से वह एटा में SP Crime के पद पर कार्यरत थे। राहुल कुमार के निधन से पुलिस विभाग को एक बड़ा झटका लगा है। आपको बता दें कि इससे पहले पंचायत चुनाव में कोरोना संक्रमित होने के बाद एटा जिले के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर अनिल कुमार भदोरिया की मौत हो चुकी है। पुलिस के लिए इस वक़्त सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कोरोना से अपने साथ साथ जनता को भी सुरक्षित रखना है। पुलिस की जरा सी लापरवाही सैंकड़ों लोगों की जान को खतरे में डाल सकती है।
कल एटा जिले की मारहरा पुलिस की लापरवाही को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। एटा पुलिस ने मामले को संज्ञान में लिया और मारहरा पुलिस को कार्रवाई के लिए निर्देशित भी किया लेकिन स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई को अमलीजामा नही पहनाया जिस कारण मारहरा के मुख्य बाजार में लापरवाही चरम सीमा पर है जो बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। विगत दिवस प्रकाशित समाचार के कुछ अंश फिर दोहरा देता हूँ ताकि मारहरा पुलिस कोरोना से लोगों की जान बचाने के लिए वचनवद्ध हो जाये।
मारहरा के बड़ा बाजार में भाजपा समर्थक व्यापारी एवं भाजपा नेता अपने प्रतिष्ठानों का हाफ शटर खोलकर तथा दुकान के अंदर ग्राहकों को बंद कर दुकानदारी कर रहे हैं। यह सब पुलिस की नाक के नीचे ही हो रहा है। स्थानीय पुलिस एक प्रभावशाली भाजपा नेता के आगे पूरी तरह नतमस्तक है जिस कारण समाचार प्रकाशित होने के बाबजूद पुलिस के कानों पर जूं तक नही रेंगी। व्यापारी सरकार के लॉकडाउन के आदेश की ही धज्जियां नही उड़ा रहे बल्कि कोविड 19 के नियमों की भी धता बता रहे हैं।
लॉकडाउन में जो व्यापारी चोरी छुपे या सत्ता की हनक के दम पर अपनी दुकानों को खोल रहे हैं वो शायद भूल रहे हैं कि जीवन से ज्यादा अनमोल कुछ नही है। इस बात की क्या गारंटी के जो ग्राहक दुकानदारों के संपर्क में आ रहे हैं वो कोरोना से संक्रमित नही होंगे। अगर एक भी कोरोना संक्रमित ग्राहक किसी व्यापारी के संपर्क में आ गया तो मारहरा की स्थिति विकराल हो जाएगी। जो पुलिस किसी कारण से लापरवाही बरत रही है उसके लिए खुद मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी क्योंकि पुलिस का सीधा वास्ता आम जनता से होता है। व्यापारियों से पुलिसकर्मियों की रोजाना मुलाकातें होती हैं। पुलिसकर्मी दूसरों की जान की न सही कम से कम अपनी जान की तो फिक्र करें।
अगर मारहरा पुलिस अपने दो पुलिस अफसरों के निधन से भी कोई सबक नही लेती है तो यह स्थानीय पुलिस का अपना निजी मसला है। सबसे खास बात यह है कि लोग मास्क का प्रयोग कोरोना से बचने के लिए नही बल्कि पुलिस बचने के लिए करते हैं। अगर पुलिस मास्क पहनने पर सख्ती न करे तो मारहरा में मास्क पहनने वालों की संख्या सिर्फ 30 प्रतिशत ही रह जायेगी। मैं एक जिम्मेदार नागरिक एवं पत्रकार होने के नाते पुलिस को सचेत कर रहा हूँ क्योंकि पुलिस भी हमारे समाज का अंग है। जब पुलिस हमारी सुरक्षा की चिंता कर सकती है तो हमें भी पुलिस के स्वास्थ्य की चिंता होना लाजिमी है। अब यह स्थानीय पुलिस बल के विवेक पर निर्भर करता है कि वो लॉकडाउन और कोविड 19 के नियमों का सख्ती से पालन कराएगी या नही?

Post a Comment

0 Comments