मैंने यह भी लिखा कि ज़मीनी हमले वह नहीं करेगा. यह भी कहा कि ईरान अब होर्मुज को कभी भी पहले की तरह नहीं खोलेगा, किसी भी क़ीमत पर नहीं. यह भी कहा कि ईरान किसी भी सूरत में अमेरिकी की शर्तें नहीं मानेगा.
सारी बातें सच साबित हुईं.
वजह सिंपल है. अगर आप भावुक हुए बिना किसी घटनाक्रम को सही संदर्भ में देखेंगे, तो चीज़ें स्पष्ट होने लगेंगी.
ईरान ने यह युद्ध ऐतिहासिक अंदाज़ में जीता है. अमेरिका को हर मोर्चे पर शिकस्त खानी पड़ी है. मैंने कल भी कहा था कि अमेरिका अभी सिर्फ़ इतना चाहता है कि होर्मुज खुल जाए, ताकि ट्रंप इसे अपनी जीत करार देते हुए युद्ध बंद कर सके. ट्रंप ने वही किया.
ट्रंप ने अपनी पोस्ट में इसे लगभग जीत करार दिया है, लेकिन वह यह नहीं बताया कि होर्मुज अभी भी IRGC की निगरानी में खुला है और ईरान-ओमान वहां से गुज़रने वाले जहाज़ों से शुल्क लेता रहेगा. कल ही मैंने कहा कि ईरान ने अमेरिका को बस इतनी ढील दी है कि हर्ज़ाना वह उससे वसूलने के बजाय, होर्मुज के टोल से हासिल करेगा. वही हो रहा है.
मैंने यह भी लिखा था कि ट्रंप कुछ दिनों की मोहलत चाहता है, ताकि दुनिया का ध्यान मौजूदा युद्धविराम पर टिका रहे और दस दिन बाद जब लोग वॉर अपडेट लेना भूल जाएंगे, तब अमेरिका चुपचाप ईरान की डील मान लेगा. वही हुआ.
अमेरिका ने ईरान की सभी 10 शर्तें फ़िलहाल सैद्धांतिक रूप से मान ली है.
ईरान ने अमेरिका को जिस तरह से शिकस्त दी है, वह दुनिया की राजनीति को दीर्घकालिक तौर पर बदलने जा रही है. दुनिया से अमेरिकी प्रभुत्व के खात्मे के प्रतीक के रूप में इसे ज़माने तक याद किया जाएगा. ईरान को मेरी तरफ़ से सलाम पेश है!
सोर्स: FB

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