1945 में इसके निर्माण में उस समय समाज के प्रत्येक वर्ग ने इसमें हिस्सा लिया था - जिसमें की नवाब परिवारों - अन्य रियासतों व सेठ परिवारों के अलावा तमाम उद्योगपतियों व आम जनों का आर्थिक सहयोग था !
सबसे बड़ा आर्थिक सहयोग नवाब मोहम्मद मुज़म्मिउल्लाह साहब शेरवानी - रियासत भीकमपुर - का था , जो कि ₹ 15000 व एक ब्लॉक का निर्माण था - जिसमें कि संस्थापक श्री डॉक्टर मोहन लाल जी की प्रतिमा भी लगी हुई है !
इसमें शेरवानी परिवार के 8 लोगों का आर्थिक सहयोग है - जिसमें कि परनाना साहब नवाब सदर यार जंग साहब व नाना साहब अल्हाज उबैद रहमान शेरवानी साहब शामिल हैं !
इस अस्पताल के 50 वर्ष , 1936 - 1986 तक - नाना साहब अल्हाज उबैदुर रहमान शेरवानी साहब ( पूर्व विधायक - अलीगढ ( 1926 - 1952 ) - पूर्व वाइस चांसलर - पूर्व टैजरर व पूर्व प्रो चांसलर - अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ) आनरेरी ( बगैर वेतन / तनख्वाह लिये ) ट्रेजरर और बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज़ में रहे - उस समय विख्यात नेत्र चिकित्सक श्री डा० जे : एम पाहवा साहब - गांधी नेत्र चिकित्सालय के सीएमओ हुआ करते थे !
बस एक प्रश्न दिमाग़ में आया कि आमजन की सेवा के लिए उस समय किस तरह वह लोग , जिनके पास बहुत या कम धन हुआ करता था आगे आया करते थे - और उस कार्य से उन्हें कोई भी आर्थिक फायदा नहीं लेना होता था - और सारे धर्मों के लोग
मिलकर - आम जन को फ़ायदे के लिए - एक बड़े कार्य की बुनियाद रखा करते थे !
सच तो यह है जब अच्छा कार्य करने वाले लोगों को भुलाया जाता है - तब फिर हर जगह , लूटमार करने वाले लोग ही समाज में आगे आते हैं !
इस ऐतिहासिक नेत्र चिकित्सालय में आर्थिक सहयोग देने वाले प्रत्येक - समाज के भले - को समर्पित दानदाता को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि !!!

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