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अगर यही कानून है तो फिर गरीब सुरक्षित कहाँ है..?

ये यूपी के आगरा जिले के वीरई गांव का नरेंद्र है।
घर-घर दूध बेचकर अपने परिवार का पेट पालता है।

नरेंद्र को टेंपो चलाना नहीं आता टेंपो उसका बड़ा भाई धीरज चलाता है।

को रोज की तरह दोनों भाई आगरा दूध बांटने गए थे।

बड़ा भाई धीरज टेंपो खड़ा कर के अपने छोटे भाई नरेंद्र को टेंपो पर छोडकर कॉलोनीयों के घरों में दूध देने चला गया।

इसी दौरान जीवनी मंडी चौकी के इंचार्ज रविंद्र साहब किसी दूसरे झगड़े में पकड़े गए युवकों को थाने ले जाने के लिए नरेंद्र से टेंपो को थाने ले जाने के लिए कहते हैं।
नरेंद्र ने हाथ जोड़कर कह दिया साहब मुझे टेंपो चलाना नहीं आता मेरा भाई चलाता है।

बस इतनी सी बात पर लात-घूंसे बरसाए गए और घसीटकर थाने ले जाया गया
डंडों से पैरों पर मारा गया मारते-मारते डंडे तक टूट गए।

दर्द से तड़पते नरेंद्र के नाखून तक उखाड़ दिए गए रहम की एक झलक तक नहीं दिखाई गई कसूर सिर्फ इतना था कि एक गरीब युवक टेंपो चलाना नहीं जानता था।

अगर यही कानून है तो फिर गरीब सुरक्षित कहाँ है..?

मानवाधिकार आयोग सुन रहा है क्या..? 
इस पर जवाब चाहिए प्लीज चुप्पी भी अपराध है।
सोर्स: Social media 

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