समय के निरंतरता और बदलाव के साथ चलते हुए एएमयू का एक चरित्र कभी नहीं बदला की यह हमेशा सत्य और इंसाफ के साथ खड़ा रहा- श्वेता भट्ट





                           Photo:- ऑनलाइन वार्ता

अलीगढ़ / आईपीएस ऑफिसर जनाब संजीव भट्ट की पत्नी श्रीमती श्वेता भट्ट ने आज ऑनलाइन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के शताब्दी वर्ष समारोह के मौके पर एएमयू के छात्रों को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने विश्व ख्याति प्राप्त अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की तारीफ की और एक बहुत अहम बात उन्होंने इस विश्वविद्यालय के बारे में यह कहा कि समय के निरंतरता और बदलाव के साथ चलते हुए इस विश्वविद्यालय का एक चरित्र कभी नहीं बदला की यह हमेशा सत्य और इंसाफ के साथ खड़ा रहा। भारतीय राष्ट्र की कल्पना पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि हमारा देश हमेशा से आपसी मेलजोल और सद्भाव के साथ-साथ लोगों के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए खड़ा रहा है लेकिन इधर कुछ समय से हमारे देश के अंदर इन चीजों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और संविधान के आधारभूत मूल्यों से देश को दूर किया जा रहा है, अब तो ऐसा लगता है जैसे हमारे देश में मूलभूत अधिकारों की कोई अहमियत ही नहीं बची है। इस वक्त कुछ सालों से यह देखा जा रहा है कि सरकार के गलत फैसलों और कार्यों के खिलाफ जो लोग भी खड़ा होने की हिम्मत कर रहे हैं और अपना विरोध जताते हैं उन्हें बुरी तरह कुचलने की कोशिश की जाती है और इसके लिए हर तरह की मशीनरी का प्रयोग किया जा रहा है।


उन्होंने अपने पति का उदाहरण देते हुए बताया की 2002 गुजरात नरसंहार भारत की इतिहास का एक काला दौर रहा है और इसमें सरकार की भी सहभागिता रही, इसी के खिलाफ संजीव भट्ट साहब ने आवाज उठाई तो उन्हें व्यक्तिगत, प्रोफेशनल और सामाजिक तौर पर प्रताड़ित किया गया और किया जा रहा है। 2002 गुजरात नरसंहार को लेकर 2009 में अदालत ने कमीशन का गठन किया और उसके समक्ष संजीव भट्ट ने पेश होकर सरकार की सहभागिता को उजागर किया वह एक ऐसा वक्त था कि बहुत सारे लोग सरकार की खौफ की वजह से उस आयोग के सामने प्रस्तुत तक भी नहीं हुए लेकिन इन्होंने अपनी प्रोफेशनल और सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए अपने दायित्व का निर्वहन किया। उन्हें इसके लिए बड़ी प्रताड़ना सहनी पड़ी जिसमें 5 सितंबर 2018 को उन्हें एक फर्जी केस जो 30 साल पुराना था में गिरफ्तार किया गया जबकि कमाल की बात यह है कि उस आदमी को ना तो संजीव भट्ट ने अरेस्ट किया था और ना ही उससे पूछताछ किया था इसके  बावजूद उस आदमी के जेल से निकलने के 18 दिन बाद मृत्यु हुई थी और उसके शरीर पर अंदरूनी या बाहरी किसी प्रकार के चोट का कोई निशान भी नहीं था। उन्होंने यह भी कहा की तकरीबन 3 साल से वह उनके लिए अदालतों का दरवाजा खटखटा रही हैं ताकि उनके पति को जमानत मिले लेकिन राजनीतिक तौर पर उनको प्रताड़ित किया जा रहा है। संजीव भट्ट के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि जब भी मैंने उनसे उन को होने वाले नुकसान के बारे में कहा तो उन्होंने एक ही बात कही कि मेरा, तुम्हारा और हमारे परिवार का नुकसान देश के नुकसान से बड़ा नहीं हो सकता है और यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं है बल्कि नफरत और मारधाड़ करने वाली विचारधारा के खिलाफ है जो कि किसी भी हालत में लड़नी जरूरी है अगर हमें भारतीय राष्ट्र की मूलभूत मूल्यों को बचाना है। इस परिपेक्ष में बात करते हुए उन्होंने कहा की इस वक्त जवानों की हिम्मत बड़े बुजुर्गों की बुद्धिमता और सभी लोगों के दूरदर्शिता को एक साथ लाकर इस नफ़रत भरे विचारधारा के खिलाफ लड़ना होगा। उन्होंने एक और बहुत अहम बात यह कही कि आप का कार्य करना या निष्क्रियता देश के भविष्य को तय करेगा। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने यह भी कहा कि आप का  अराजनीतिक  होना समस्या का हल नहीं है क्योंकि अगर आप अराजनीतिक होंगे तो अपने अधिकार को भी ना बचा पाएंगे। इस ज़ुल्मो ज़्यादती की आंधी के खिलाफ खड़ा होना इस वक्त देश के लिए बहुत आवश्यक है।

आखिर में उन्होंने संजीव भट्ट साहब के हवाले से एक शेर कहा जोकि उनके अनुसार संजीव भट्ट साहब अक्सर कहा करते हैं की-


सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं

सारी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए,

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,

हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए।


इस मौके पर श्वेता भट्ट के संबोधन के बाद धन्यवाद प्रस्ताव पेश करते हुए आमिर मिनटोई  ने कहा कि हिंदुस्तान का मुसलमान संजीव भट्ट और उनके पूरे परिवार के एहसान तले दबा हुआ है और यह ऐसा  क़र्ज़ है कि जिसको हिंदुस्तान का मुसलमान कभी उतार ही नहीं सकता, आमिर मिनटोई ने कहा कि ना तो हिंदुस्तान की आजादी के  लिए अपनी जानौं की आहुति देने वालों  के सिद्धांतों पर मौजूदा प्रणाली टिकी हुई है और ना ही अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी की प्रणाली सर सैयद के सिद्धांतों पर। सभी स्वार्थी हो चुके हैं और हुकूमत में बैठे स्वार्थी लोगों के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं।  आमिर मिनटोई ने आगे कहा कि संजीव भट्ट जैसे ईमानदार अफसरों को देखकर ऐसा लगता है कि देश में सद्भावना की किरण अभी बाकी है।  संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट से इस लड़ाई में पूरा साथ देने का वादा भी किया गया।इस मौके पर छात्रों ने श्वेता भट्ट से सवाल भी किए जिसका उन्होंने बहुत ही बेबाकी के साथ जवाब दिया ।

Q_ कलीम अशरफ 

मैम क्या आपको अदालत पर भरोसा है

Ans _ जी बहुत सुप्रीम कोर्ट पर ज्यादा भरोसा है

Q_ तंजीम क्या संजीव भट्ट सर के लिए कोई कमेटी का ग्रुप बनाया केस लड़ने के लिए

Ans_ वकील फाइट करेंगे ग्रुप इसमें नहीं बनता है कपिल सिब्बल वकील है उनकी टीम कानूनी तौर पर पूरी लड़ाई लड़ेगी

Q_ मैम अदालत अभी तक कोई कार्यवाही कर पाई

Ans_ हां अभी प्रोसेस में है इंसाफ मिलेगा

Q_इरशाद क्या चीज कंडीशन में हमारे मुल्क में हम लोग रह रहे हैं इन हालात में क्या आपको लगता है कि छात्रसंघ कोई क्रांति या हालात को बदलने वाली पहल करके बदलाव ला सकते हैं

Ans_ जब भी कोई बदलाव आया है या क्रांति हुई है तो हमेशा छात्र ही जवान लोग आगे रहे हैं और आज भी उन्हीं से उम्मीद छात्र देश का भविष्य है

Q_ जुबेर क्या मोदी जी ने अपने बचाव के लिए संजीव सर को जेल में डाला है

Ans_ यह तो मोदी जी ही बता पाएंगे उनके पास सब है हमारे पास कुछ नहीं है संजीव भट्ट 2002 गुजरात दंगों के अकेले कबाब बचे हैं तो उनसे किसी को क्या खतरा है यह समझने वाली बात है सब जानते हैं यह पूरा तंत्र है जो संजीव जी के पीछे लगा है 30 साल पुराने मुकदमें जिनका कोई जेब कोर्ट से खत्म हो गए हैं उन्हें खोला गया लाखों रुपए सरकार की तरफ से वकीलों पर खर्च किए गए और करे जा रहे हैं यह सब बेवजह नहीं है यह सब सोचने की बात है अगर उन्हें डर नहीं तो छोड़ने संजीव भट्ट को

Q_ इमरान हम किस तरह से इस लड़ाई में आपका साथ दे सकते हैं

Ans_ तुम लोग आवाज उठाते हो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी हक के लिए इंसाफ के लिए आवाज उठाती है अब जब वह नहीं है तो तुम लोग बुलंद आवाज पर हो उनकी और हम सब मिलकर यह लड़ाई लड़ेंगे और संजीव भट्ट जी को लड़ाई आगे तक लड़ेंगे उनकी जो बची हुई लड़ाई है वह आगे तक लड़ेंगे और मैं अकेली नहीं आप सब मेरे साथ हैं

Q_ नोमान नोमान नेशनल मीडिया से आपको कितना सपोर्ट है

Ans_ मीडिया को जो करना चाहिए आजकल वह करती नहीं फ्रीली शायद नहीं कर पाती है

Q_रियाज आपको इतनी ताकत कहां से मिली गवर्नमेंट से लड़ने की

Ans_मैं 20 साल की थी सर 21 साल के थे हम साथ में पढ़ते थे सिविल सर्विसेज की तैयारी भी साथ ही में की और उसी दौरान हमें प्यार हुआ शादी भी हो गई हम दोनों का नजरिया एक जैसा है जितना सर में ताकत है हक के साथ खड़े होने की वह उन्हीं से मुझे मिली सर से ही मिली लड़ने की 

Q_हिना एम यू छात्र हमेशा आपके साथ हैं।

विज्ञप्ति:- आमिर मिन्टोई

Ans_ धन्यवाद मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्रों का

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