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हत्या को हत्या तभी माना जाएगा जब अपराधी मुस्लिम हो

इतनी घृणा, इतनी नफ़रत…
नरसंहार का आह्वान.... मुसलमानों से क्यों इतनी नफ़रत..????
कई बार लिखने की कोशिश की, लेकिन लिख नहीं पा रहा था। जितनी बार उत्तम नगर की घटना पर वहां से जो वीडियो आ रही है सोशल मीडिया पर देखता हूँ, मन विचलित हो जाता है। जो घटना हुई वह बेहद दर्दनाक है , बिना किसी किंतु-परंतु के उसका कोई भी जस्टिफिकेशन नहीं हो सकता। 
लेकिन सवाल यह है कि होली के दिन दिल्ली में और भी हत्याएँ हुईं, जिनमें दोनों पक्ष हिन्दू थे। क्या वहाँ पूरे समुदाय के खिलाफ़ इस तरह का ज़हर फैलाया गया ????
क्या वहाँ तथाकथित हिंदूवादी संगठनों की भीड़ पहुँची?
क्या वहाँ बुलडोज़र चलाया गया?
क्या नफ़रत फैलाने वाली मीडिया ने उसे दिन-रात चलाया? नहीं ... क्योंकि वहाँ हिंदू-मुस्लिम का मसाला नहीं था।
आज हालात यह हैं कि अगर आरोपी मुस्लिम हो, तो पूरे मुस्लिम समाज को कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। उन्हें जिहादी कहा जाता है, पाकिस्तान भेजने की बातें होती हैं, पूरे परिवार को बर्बाद करने और पलायन के लिए मजबूर करने तक की मांग उठने लगती है।
स्पष्ट कह रहा हूँ ,जो आरोपी है उसे सख्त से सख्त सज़ा मिलनी चाहिए, चाहे वह किसी भी धर्म का हो।
लेकिन किसी एक अपराध के लिए पूरे समाज को अपराधी ठहराना कहाँ तक न्याय है?
कुछ सवाल हैं मेरे 
लखनऊ में जिस बच्चे को गोली मार दी गई, क्या उसके परिवार ने इस तरह ज़हर उगला?
क्या आरोपी के घर पर बुलडोज़र चला? क्या एनकाउंटर हुआ?
बिहार में एक रोज़ेदार मज़लूम मुस्लिम महिला को शराब में पेशाब मिलाकर पिलाया गया, इतना पीटा गया कि उसकी मौत हो गई , क्या उसके परिवार ने पूरे समुदाय के खिलाफ़ नफ़रत फैलाई?
दरभंगा में रमज़ान के दौरान एक बुज़ुर्ग को पीट-पीटकर मार दिया गया , क्या वहाँ किसी ने नरसंहार का आह्वान किया? नहीं।
तो फिर हर बार अगर हिंदू-मुस्लिम के बीच कोई दुर्भाग्यपूर्ण घटना हो जाए, तो पूरे मुसलमानों को ही कातिल क्यों ठहरा दिया जाता है?
और जब कोई मुसलमान सिर्फ अपनी पहचान की वजह से मारा जाता है, तो न खबर बनती है, न बुलडोज़र चलता है, न न्याय की उतनी आवाज़ उठती है।
कुछ लोग मुसलमानों को “जिहादी” बताकर इस देश का माहौल खराब कर रहे हैं।
मत कीजिए ऐसा…नफ़रत की खेती मत कीजिए।
वरना याद रखिए , नफ़रत की आग जब फैलती है तो पूरा देश जला देती है।
अंत में इतना होली के दिन अन्य जगहों पर जो हत्याएं हुई दिल्ली में क्या वो हिंदू नहीं थे , या उनकी हत्या तब मानी जाती जब अपराधी मुस्लिम होते ।
यानी को अब मान लिया जाए जिस में अपराधी एक समुदाय के होंगे वो हत्या नहीं कहलाएगा।
हत्या को हत्या तभी माना जाएगा जब अपराधी मुस्लिम हो । अपराधी के घर पर बुल्डोजर तभी चलेगा जब वो मुस्लिम हो।
एक पक्षीय पीड़ित हिन्दू परिवार से दिल्ली की मुख्यमंत्री से मिलता है आखिर सच्चाई किया? है न्याय कोर्ट करता कार्यवाही पुलिस करती नहीं बुलडोजर चला घर गिरा दिया आखिर मुस्लिमों के साथ ही क्यों?

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