इज़रायल का कोई पैंतरा काम नहीं आ रहा है. दो दिन पहले तुर्किये (तुर्की) के दक्षिणी हिस्से में मिसाइल हमला हुआ और हमला होते ही आनन-फ़ानन में इसके लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहरा दिया गया. ईरान ने ऐसे किसी भी हमले से साफ़ इनकार कर दिया है.
अब कई रक्षा विशेषज्ञ बता रहे हैं कि यह हमला इज़रायल ने ही जान-बूझकर किया है, ताकि दोष ईरान पर मढ़ा जा सके. चूंकि तुर्किये नाटो का सदस्य है और इस तरह के हमले से नाटो का अनुच्छेद-5 लागू हो जाएगा. अनुच्छेद-5 का मतलब है- नाटो के एक देश पर हमला, मतलब सब पर हमला.
लेकिन यह बात तो किसी को भी खटकेगी कि ईरान अभी नया मोर्चा क्यों खोलेगा? सीधी बात है कि जब तक उस पर तुर्किये से कोई हमला नहीं होता, तो ईरान क्यों मिसाइल दागेगा?
हमला होते ही जिस विद्युत गति से ईरान का नाम उछाला गया, वह चालबाज़ी की ओर एक स्पष्ट इशारा था. अब तक एक भी सबूत नहीं मिला है जिससे यह कहा जा सके कि हमला ईरान ने किया था.
इज़रायल अब पूरी तरह पस्त हो गया है.

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