उत्तराखंड से उमेश राणा की रिपोर्ट पहाड़ का युवा फंसा नशे की गिरफ्त में मासूमों पर भी कसा नशे का जाल नशे के सौदागर गिरफ्त से बाहर



नैनीताल / उत्तराखंड के युवा आज नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं और नशे के सौदागर अपने काले क्रियाकलापों में दिन प्रतिदिन पांव पसारते जा रहे हैं नशे के सौदागरों का जाल मलीन बस्तियों से स्कूलों कालेजों तक पहुंच गया है जिसका शिकार कम उम्र स्कूली बच्चे एवं नौजवान हो रहे हैं कुमायूं का रुद्रपुर हो या काशीपुर लालकुआं, हल्द्वानी ,बाजपुर हो या सितारगंज या खटीमा कमोबेश हर शहर में नशे के सौदागर अपने पांव पसार चुके हैं रुद्रपुर का इंदिरा कॉलोनी हो या खेड़ा या रोडवेज के आसपास का इलाका आदर्श कॉलोनी हल्द्वानी का बनभूलपुरा हो या इंदिरानगर मंडी हो या तिकोनिया स्थित मोटरलाइन लालकुआं का बंगाली कॉलोनी नगीना कॉलोनी 25एकड़, खड्डी मोहल्ला लाइनपार संजय नगर, नई बस्ती और घोड़ा नाला रोड पर नशेड़ियो का जमावड़ा अक्सर देखा जा सकता है बात यह नहीं है कि पुलिस इस मामले में अनभिज्ञ है  पुलिस के रोजनामचा में कच्ची एवं अवैध शराब एवं स्मैक के केस देखे जा सकते हैं और पुलिस अपनी ओर से काफी प्रयास भी करती है किंतु नशे के सौदागरों के हाथ इतने लंबे हैं कि उनके सरगना कब्जे में नहीं आते पुलिस छोटे-मोटे प्यादों को पकड़ कर उन्हें एनडीपीएस एक्ट में जेल भेज देती है आप इसे पुलिस की नाकामयाबी कहें या नशे के सौदागरों का चौकस सूचना तंत्र  कि वे पुलिस के छापे से पहले ही रफूचक्कर हो जाते हैं और पुलिस के कब्जे में नहीं आते इस मामले में क्षेत्रीय लोगों ने आंदोलन एवं धरना प्रदर्शन देते हुए पुलिस को ज्ञापन भी दिए हैं जिसमें इस धंधे में कुछ सफेदपोश के होने की आशंका जताई है पुलिस का सूचना तंत्र नाकामयाब होने की वजह क्या है या तो सरकारी तंत्र से नशे के सौदागरों को तंत्र मजबूत है या पुलिस के प्रयासों में कहीं इमानदारी की कमी रह जाती है हालांकि पुलिस शिक्षण संस्थानों एवं मलिन बस्तियों में जाकर लोगों को जागरूक करने का प्रयास करती है लेकिन यह जागरूकता कहां तक हो पाती है यह सोचने का विषय है इन प्रयासों की नाकामयाबी की वजह क्या है यह तो नहीं बता सकते किंतु यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि अभी तक पुलिस ने इस अपराध के इस धंधे के छोटी मोटी मछली और कीड़े मकोड़ों को पकड़कर ही अपनी पीठ थपथपा ली है इस समुंद्र के मगरमच्छों पर पुलिस अभी तक नहीं हाथ डाल पा रही है कारण क्या है यह सोचनीय विषय है लेकिन यदि सरकार ने नशे के सौदागरों पर यदि शीघ्र शिकंजा नहीं कसा तो वह दिन दूर नहीं जब पहाड़ की जवानी इन नशे के सौदागरों के चंगुल में कसमसाती नजर आएगी और नशे के सौदागरों का जाल यही तक नहीं फैला है नशे के इंजेक्शन भी युवाओं में बहुत प्रचलित है जो बड़ी आसानी से कुछ कथित डाक्टरो के क्लिनिको अथवा दवाई की दुकानों से आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं इस मामले में सरकार से और पुलिस से सिर्फ एक ही बात कहना चाहता हूं 
 अल्लामा इकबाल की कुछ लाइनें हैं

अपनी फिक्र कर नादां मुसीबत आने वाली है,
तेरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में,

न समझोगे तो मिट जाओगे ऐ हिन्दोस्तां वालो,
तुम्हारी दास्तां तक भी न होगी दास्तानों में।

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