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मण्डलायुक्त ने योगेन्द्र शर्मा के उपन्यास ’कितनेअभिमन्यु’ का किया विमोचन उपन्यास में तीन मध्यवर्गीय दम्पतियों के पारिवारिकजीवन का है बेहतरीन अक्कासीl


 (Photo: पत्रिका का विमोचन करते मंडलायुक्त)       अलीगढ़(संवाददाता) मण्डलायुक्त अजय दीप सिंह ने आज यहां अपने कार्यालय कक्ष में सार्थक संवाद अलीगढ़ द्वाराआयोजित लोकार्पण समारोह में उपन्यासकार योगेन्द्र शर्मा द्वारा लिखित उपन्यास ‘कितने अभिमन्यु’ का विमोचन करते हुए योगेन्द्र शर्मा द्वारा किये जा रहे साहित्य सेवा की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि श्री शर्मा के हिन्दी साहित्य में किये गये बेहतरीन योगदान पर उनके कहानी संग्रह ’रामराम कंछीलाल’ को 0प्रहिन्दी संस्थान द्वारा रावी एवार्ड से नवाजा गया है। इनके द्वारा कहानी संग्रह ’तीसरे रावणकी मौत, ’राम राम कंछीलाल’ एवं ’मरद , लघु कथा संग्रहशिनाख्त’ एवं ’कितने भस्मासुर’ के अतिरिक्त उपन्यासरूहेलखण्ड का गॉधी’ का प्रकाशन किया गया है। श्री शर्मा द्वारा उपन्यास ‘कितने अभिमन्यु’ में तीन मध्य वर्गीय दम्पतियों के पारिवारिक जीवन पर बेहतरीन अक्कासी करते हुए आज के परिवारों की टूटन पर कटाक्ष किया गयाहै।
   श्री सिंह ने बताया कि श्री शर्मा द्वारा उपन्यास में तीन मध्य वर्गीय परिवारों के पति-पत्नी जिसमें एक-एक ग्यारहएक-एक दो एवं एक-एक शून्य पर आधारितको पात्र के रूप में रखते हुए सुन्दर ढ़ग से आम भाषा में वर्णन किया गया है। उन्होंने कहा कि पति और पत्नी के सम्बन्धों पर उनके स्वभाव एवं परिवार की पृष्ठभूमि का भी असर पड़ता है। जिन परिवारों में स्वार्थ की भावना अधिक होती हैवहां कलह और विघटन जन्म लेते हैं। उन्होंने कहा कि उपन्यास में संयुक्त एवं एकांकी परिवार पर वृहद रूप से विश्लेषण करते हुए संयुक्त परिवार की महत्ता पर विशेषबल दिया गया है। पारिवारिक रिश्ते विश्वासमृदु वचन एवंएक-दूसरे के सम्मान से लम्बे समय तक जुड़े रहते हैंजहां स्वार्थ होता है वहां परिवार टूटने लगता है। उपन्यासकार योगेन्द्र शर्मा ने कहा कि जिन दम्पत्तियों में आपसी समझबूझ एवं एक-दूसरे के सम्मान की भावना होती है वह गुणोत्तर वृद्धि करते हुए खुशहालएवं समृद्ध जीवन व्यतीत करते हैं, और पति की आमदनी में ही अपना गुजारा कर लेती है। दूसरे तरह के परिवार जहां बराबरी के अधिकार के रूप में पति और पत्नी जीवन व्यतीत करते हैं उनका जीवन धनात्मक वृद्धि करते हुएआगे बढ़ता है इसके वितरीत एक वह परिवार है जहां एक-दूसरे को कमतर आंकते हुए नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं और स्वयं अपने भोजन की थाली और दिली सकून परझाड़ू फेरते हैं। उन्होंने कहा कि इन तीन तरह के परिवारों को उपन्यास की पृष्ठभूमि में रखते हुए रोचक ढंग से पटकथा को आगे बढ़ाया गया है।
                समारोह को डामुरारीलाल शर्माराजीवलोचन शुक्लायादराम शर्माशम्भु नारदगौतम शाह हजाराप्रोअजय आदि ने उपन्यास पर प्रकाश डालते हुएकहा कि इस उपन्यास में मध्य वर्गीय परिवारों की जीवन पर केन्द्रित पति पीडित पत्नी एवं पत्नी पीड़ित पति का मार्मिक ढ़ंग से वर्णन करते हुए समाज में फैली कुरीतियों पर भी प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम का संचालन डावेदप्रकाश अमिताभ द्वारा किया गया। इस अवसर पर जितेन्द्र शर्माडाभगत सिंहश्रीमती सुनीला शर्मा आदि उपस्थित थे।

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