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मुस्लिम समुदाय कब तक सपाई समाजवाद के नाम पर बंधुआ मजदूर बना रहेगा?


यह उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे कड़वा और नग्न सच है कि समाजवादी पार्टी का 'समाजवाद' सिर्फ और सिर्फ एक विशेष जाति (यादव समाज) के उत्थान और उन्हें आगे बढ़ाने तक सीमित है। मलाईदार पद हों, संगठन में असली ताकत हो या सरकार आने पर विकास कार्य—प्राथमिकता हमेशा तय होती है। लेकिन सबसे बड़ा अफसोस यह है कि इस पूरी व्यवस्था को बनाए रखने के लिए मुस्लिम समुदाय के वोटों का इस्तेमाल एक सीढ़ी की तरह किया जाता है।
अखिलेश के दरबार में 'रबर स्टैंप' बने मुस्लिम विधायक और सांसद!
मुस्लिम समाज को यह सोचना होगा कि उनके नाम पर चुनकर आए नेता आज कहाँ खड़े हैं? चाहे विधानसभा हो या संसद, ये चेहरे सिर्फ संख्या बल दिखाने के लिए इस्तेमाल होते हैं। जब भी कौम के असली मुद्दों, सुरक्षा, या हक की बात आती है, तो इन तथाकथित कद्दावर नेताओं की जुबान पर ताले लग जाते हैं।
आज चाहे विधानसभा में विधायक अताउर रहमान, शहज़िल इस्लाम, कमाल अख्तर, महबूब अली, ज़ियाउर रहमान बर्क (जो अब सांसद हैं), इक़बाल महमूद, शाहिद मंजूर, रफ़ीक अंसारी, नवाब जान, या फिर संसद में चुनकर गए मुस्लिम चेहरे हों—इन सभी की राजनीति सिर्फ और सिर्फ अखिलेश यादव की परिक्रमा करने तक सीमित रह गई है।
निजी स्वार्थ के लिए पूरी कौम का सौदा! करते हैं ये 
ये नेता विधानसभा और संसद की एलीट कुर्सियों पर बैठकर अपने व्यक्तिगत राजनीतिक फायदे, अपनी सुरक्षा, और अपने व्यापारिक हितों को बचाते हैं। अपने आका को खुश रखने के लिए ये पूरी कौम की सामूहिक आवाज और स्वाभिमान का सौदा करने से भी पीछे नहीं हटते। जब तक चुनाव होता है, ये कौम का डर दिखाकर वोट बटोरते हैं, और जैसे ही चुनाव खत्म होता है, ये अखिलेश यादव की मानसिक गुलामी में लीन हो जाते हैं।
अखिलेश यादव की पार्टी में इन मुस्लिम विधायकों और सांसदों की हैसियत एक दरबारी से ज्यादा कुछ नहीं है, जो केवल उनके फैसलों पर हामी भरने के लिए रखे गए हैं।
अब जागने का वक्त है!
मुस्लिम समुदाय को अब इस सियासी गुलामी और दोहरे मापदंड को पहचानना होगा। कब तक आप दूसरों को राजा बनाने के लिए अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारते रहेंगे? जो नेता आपके हक के लिए अपने आका की आंखों में आंखें डालकर बात नहीं कर सकता, उसे आपका प्रतिनिधित्व करने का कोई अधिकार नहीं है। इस बंधुआ मजदूरी और चमचागिरी की राजनीति को अब सिरे से खारिज करने का समय आ गया है!

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