कैसे पीछा छुड़ाओगे इनसे ?


भारत में 15% ।अनुमानित 20 करोड़ । 2011 की जनगणना के अनुसार ।अब संख्या अनुमान से भी बहुत अधिक हो सकती है ।

जब सोशल मीडिया के युग में .एक घटना पर बवाल हो जाता हो तब क्या इन्हें हटा देना या भेज देना संभव है ?किसी को लगता है तो भूल जाओ

मेरे साथ है मुन्ना भाई ।घर-घर से कपड़े लेकर घुलाई और प्रेस का काम करते हैं ।50 वर्ष पहले कक्षा चार में साथ बैठे थे ।वह आगे नहीं पढ़ पाया । .दर्जा दोस्ती का है मगर मुन्ना संकोच करता है खुद को कमतर समझता है ।

 हिंदू मुस्लिम मामलों पर मेरी हां में हां मिलाता है ।अपराधियों पर बुलडोजर और एनकाउंटर को सही ठहराता है । इसे कभी बिजली वाला ठग लेता है और कभी ब्याज वाला ।मुझे उससे मिलता है एक आवाज पर समर्पण ।अनेक बार दिक्कत में आता है तो मैं उसके साथ खड़ा हूं ।

मुझे जिहादियों से सख्त नफरत और घृणा है .तो क्या मुन्ना की दाढ़ी के कारण इसको भी जेहादी मान लूँ '

  ।

अभी मैंने जो लोहे का जाल लगवाया हिंदू मिस्त्री जी थे । 6 कुंतल लोहा लगाने में डेढ़ महीना लगा दिया ।फिर एक मुस्लिम मिस्त्री आया 18 कुंतल लोहा 6 दिन में लगाकर अपने पैसे लेकर चला गया ।

मंदिर में किसी ने कहा अपने धर्म का ही मिस्त्री होना चाहिए भगवान की अलमारी बननी थी ।उसने बताया 70000 रुपए ।एडवांस लेकर साफ हो गया ।15 दिन बाद मेरा एक मुस्लिम छात्र मिला । वह 45000 रुपए में तीन दिन में काम करके चला गया ।

 इसके उलट भी बहुत उदाहरण हो सकते हैं सबके अपने अनुभव होंगे । कारण है हमारे द्वारा मेहनत और कारीगरी के काम को छोटा मान लेना । सबको सरकारी नौकरी चाहिए कैसे मिल सकती है

बेरोजगार घूम लेंगे ।लेकिन लोहार बढई धोबी नाई ड्राइवर का काम नहीं करेंगे 

आप लाख चाहकर भी सामाजिक ताने-बाने में रच बस चुके किसी धर्म के लोगों को मुख्य धारा से नहीं निकाल सकते ।

खबरें हैं यह पूरी दुनिया में .इस्लाम का शासन स्थापित करना चाहते हैं फिदायीन और कथित जेहाद के दम पर । .मुझे लगता है यह अपनी बढती जनसंख्या के दबाव में .मेहनत और कारगरी के दम पर .भारत की नसों में गहराई तक शामिल है । कैसे मुक्ति पाओगे? बेवकूफाना और मूर्खाना बात लगती है ।

आप प्रेम के दम पर इन्हें वापस क्यों नहीं ला सकते !केवल नफरतों से क्या हासिल होगा ? आने वाली पीढियां का क्या होगा?
या फिर इधर से भी धर्म युद्ध की घोषणा होगी ।
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