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पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की गिरफ्तारी पर जांच अधिकारी को कोर्ट की फटकार


यूपी। देवरिया जेल में धोखाधड़ी के मामले में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने अपना अनशन खत्म कर दिया है। शनिवार को जमानत याचिका पर सुनवाई के लिए उन्हें देवरिया की सीजेएम मंजू कुमारी की अदालत में पेश किया गया।

जांच पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान जज ने जांच अधिकारी से गिरफ्तारी के आधार, उपलब्ध साक्ष्यों और जांच की दिशा को लेकर कई सवाल किए। लेकिन किसी भी सवाल का संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका। इस पर कोर्ट ने विवेचना की गुणवत्ता और निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए, जिससे जांच एजेंसी की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई।

पेशी के बाद अमिताभ का बयान

जेल से भूख हड़ताल के बीच अदालत पहुंचे अमिताभ ठाकुर ने कहा कि उनके खिलाफ चुनिंदा कार्रवाई की गई है। उनका आरोप है कि असली और प्रभावशाली आरोपियों को बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जैसे ही उन्होंने पूर्व सांसद धनंजय सिंह और कुछ बड़े नेताओं से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक किया, उनके खिलाफ साजिश शुरू हो गई और मुकदमे दर्ज कर दिए गए।

'मुझे एनकाउंटर का डर था'

पूर्व आईपीएस ने दावा किया कि मुकदमा दर्ज होने के अगले ही दिन रात करीब 2 बजे अचानक उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जिस तरह रात के सन्नाटे में उन्हें उठाया गया, उससे उन्हें एनकाउंटर का डर लगने लगा था। उन्होंने कहा कि कोडीन कफ सिरप मामले में उन्हें फंसाया गया है और इस पूरे नेटवर्क में शिवम जायसवाल सिर्फ एक मोहरा है।

25 साल पुराने केस पर बहस

अमिताभ ठाकुर के वकील अभिषेक शर्मा ने कोर्ट में दलील दी कि मामला 25 साल पुराना है। इतने लंबे समय तक जांच एजेंसियां कोई ठोस सबूत नहीं जुटा पाई और अब अचानक गिरफ्तारी कर दी गई, जो न्यायसंगत नहीं है।

आगे की राह

कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 6 जनवरी तय की है। अमिताभ ठाकुर ने बताया कि न्यायालय के आश्वासन के बाद उन्होंने अपना आमरण अनशन 15 जनवरी तक स्थगित कर दिया है। जेल में उनकी नियमित मेडिकल जांच भी जारी है।

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