अमन-चैन, सुख-शांति के लिए इस अमंगलकारी आतंकवाद का जड़ से नष्ट होना बहुत जरूरी

                       इसका न कोई धर्म है, न वतन, न कोई अपना




आतंकवाद । सिरफिरे, हठधर्मी, विवेकहीन, मंदबुद्धि से जुड़े अमानवीय संगठन की कुकृत्य प्रक्रिया है, जिसके खौफ का निर्दोष मानव ही नहीं हर जीव शिकार हुआ है। मंदिर, मस्जिद, दरगाह, चर्च, गुरुद्वारा, स्कूल, रेलवे स्टेशन, संसद भवन आदि सभी जगह आतंकवाद की घटनाएं घटी हैं। इसका न कोई धर्म है, न वतन, न कोई अपना। इसे केवल हर जगह बेवजह खौफ मचाना है, जिस कारण बच्चे, जवान, बूढ़े सहित कई निर्दोष जानें गई हैं। आधुनिक खौफनाक हथियार, बम, टिफिन बम, खिलौने, बैग, पैन आदि, आत्मघाती हमले के माध्यमों से आतंक मचाने का क्रम विश्व भर में जारी है, जिसका शिकार हमारा देश भी है। 

भारत में आतंकवाद की प्रमुख घटनाओं पर एक नजर डालें- 21 मई, 1991 को तमिलनाडु के श्री पेरंबुदुर में आतंकवादी संगठन एल.टी.टी.ई. द्वारा आत्मघाती मानव बम के सहारे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या कर दी गई।

तत्कालीन वी.पी. सिंह की केन्द्र सरकार ने आतंकवाद पर नियंत्रण करने एवं आपसी सद्भाव बनाए रखने के उदेश्य से 21 मई को देश भर में आतंकवाद विरोधी दिवस मनाए जाने का निर्णय लिया। फिर भी देश को आतंकवाद से निदान नहीं मिल पाया। 


12 मार्च, 1993 को मुंबई सीरियल बम ब्लास्ट हुए, जिसमें 257 लोगों की जान चली गई, 713 घायल हुए। 14 फरवरी, 1998 को कोयम्बटूर धमाका हुआ, जिसमें 60 जानें गईं, 200 घायल हुए। 3 नवम्बर, 1999 को श्रीनगर में बादामी बाग में, अक्तूबर 2001 में जम्मू-कश्मीर विधानसभा पर, 13 दिसम्बर, 2001 को भारतीय संसद पर,14 मई, 2002 को जम्मू-कश्मीर के कालूचक में, 2 सितम्बर, 2002 को अक्षर धाम मंदिर पर आतंकी हमले हुए। 


29 अक्तूबर, 2005 को दिल्ली सीरियल बम ब्लास्ट, अक्तूबर 2007 में अजमेर शरीफ दरगाह पर आतंकी हमला, 17 जुलाई, 2006 को मुंबई रेल धमाका, 13 मई, 2008 को राजस्थान की राजधानी जयपुर में सिलसिलेवार बम विस्फोट, जनवरी 2008 में सी.आर.पी.एफ. शिविर पर हमले के साथ देश के हर भाग में निरन्तर आतंकी हमले होते रहे। 14 फरवरी, 2019 को जम्मू क्षेत्र में पुलवामा आतंकी हमले की घटना, जिसमें 40 सुरक्षा कर्मी मारे गए, ने सभी देशवासियों को झकझोर दिया। इस तरह के आतंकी हमलों में कई निर्दोष जानें गईं। आज भी आतंकवाद जारी है, जिसे निरंतर पड़ोसी देश पाकिस्तान से समर्थन मिल रहा है। 


अमानवीय आतंकवाद का विरोध हमारा देश शुरू से करता आ रहा है और आज भी कर रहा है। अभी हाल ही में गोवा में आयोजित एस.सी.ओ. के तहत हो रही विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने उद्घाटन भाषण में आतंकवाद के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए कहा कि आज आतंकवाद पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चुका है, जिस पर हर हालत में रोक लगनी जरूरी है। 


आतंकवाद से लड़ाई हमारी प्राथमिकता है और इसे जड़ से मिटाने के लिए हम संकल्पित हैं। आतंकवाद के खिलाफ सभी को मिलकर लडऩा होगा। आतंकवाद को सही ठहराना एवं इसे समर्थन देना हर हालत में गलत है। इसे किसी भी तरह की हो रही फंङ्क्षडग पर रोक लगनी जरूरी है। आतंकवाद को अभी हराया नहीं जा सका है, इसे जड़ से मिटाने के लिए सभी की सहभागिता जरूरी है। यह सभी का दुश्मन है जिसे हर हालत में मानवता के हित में मिटाना आवश्यक है। 


आतंकवाद के खिलाफ भारत की इस बुलंद आवाज की गाज निश्चित तौर पर आतंकवादियों पर गिरेगी, जिससे उनका मनोबल गिरेगा एवं दुनिया को एक दिन इससे राहत मिलेगी। अमन-चैन, सुख-शांति के लिए इस अमंगलकारी आतंकवाद का जड़ से नष्ट होना बहुत जरूरी है।





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