राशन के चावल ने दिया लोगों को रोजगार

  


चावल माफिया। सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत 80 करोड़ नागरिकों को राशन देती है क्योंकि भारत में गरीबी का आलम यह है कि भारतीय नागरिक जीने के लिए भरपूर भोजन भी उपलब्ध नहीं कर सकता है क्योंकि भारत में रोजगार का संकट भी कम नहीं है लेकिन राशन के चावल ने दो काम किये हैं एक तो गरीबों को भोजन मिल रहा है दूसरी तरफ रोजगार भी पैदा कर दिया है जैसे ही राशन कार्ड धारक को राशन मिलता है ।

उसके दूसरे दिन ही फेरी वाले लोग रोजगार के लिए घर से निकल लेते हैं और चावल को कार्ड धारक से खरीद लेते हैं क्योंकि कार्ड धारक चावल नहीं खाता है और फेरी वाले लोग किसी एक व्यक्ति को बेच देते हैं वह व्यक्ति एक ट्रक माल इकट्ठा करे आगे किसी व्यक्ति को बेचते हैं इस तरह यह चावल बार बार बिकता रहता है।

 और लोगों को रोजगार मिलता रहता है ट्रांसपोटरों और ड्राइवरों को भी काम उपलब्ध कराता है ये राशन का चावल |जब इस खरीद फरोक्त का पता पत्रकारों के माध्यम से या अन्य किसी के माध्यम से जिला पूर्ति विभाग को पता चलता है कि राशन का चावल बिकने जा रहा है तो पत्रकारों और मुखबिरों को भी काम दे चुका होता है ।

फिर जिला पूर्ति अधिकारी राशन का चावल न मानते हुए भी पकड लेता है और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत गाडी सहित चावल को अपनी गिरफ्त में लेकर कार्यवाही करता है जब यह मामला न्यायालय में पहुँच जाता है तो वकीलों को रोजगार पैदा करता है और पत्रकारों को मसाला मिल जाता है कितनों को दिया रोजगार |है ना कमाल का चावल

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