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अमुवि कुलपति प्रो. तारिक मंसूर ने उर्दू भाषा में लिखित आत्मकथा ‘मेरी राजनीतिक यात्रा‘ का विमोचन


 अलीगढ़, 7 मार्चः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने इब्ने सीना अकादमी में आयोजित एक समारोह में स्वर्गीय हाशिम किदवाई, पूर्व राज्यसभा सदस्य, की उर्दू भाषा में लिखित आत्मकथा ‘मेरी राजनीतिक यात्रा‘ का विमोचन किया।

डा० हाशिम किदवाई एक स्वतंत्रता सेनानी के साथ ही एएमयू में राजनीति विज्ञान के शिक्षक थे तथा उन्होंने अपनी आत्मकथा में 1946 तक स्वतंत्रता आंदोलन में अपने संघर्ष का वर्णन किया है।
कुलपति प्रोफेसर तारिक मंसूर ने डा० हाशिम किदवाई के साथ अपने लंबे जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आत्मकथा डा० किदवाई के जीवन और उनके विचारों के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालती है। उन्होंने एक लंबे समय तक कांग्रेस के सिपाही के रूप में संघर्ष किया और राष्ट्रवादी राजनीतिक गतिविधियों में भाग लिया। कुलपति ने कहा कि डा० हाशिम किदवाई राष्ट्र के लिए समर्पित एक राजनीतिक कार्यकर्ता थे और उन्होंने अपने सिद्धांतों के साथ अंत तक समझौता नहीं किया।
इब्ने सीना एकेडमी के संस्थापक तथा अमुवि के कोषाध्यक्ष प्रोफेसर हकीम सैयद जिल्लुर रहमान ने डा० हाशिम किदवाई की अमुवि के लिये विभिन्न सेवाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा छात्रों का बहुत ध्यान रखा। उन्होंने कहा कि डा० किदवाई का जीवन वृत्तांत न केवल उनके जीवन का इतिहास है बल्कि इससे स्वतंत्रता आंदोलन के विभिन्न पहलु भी उजागर होते हैं। इससे ज्ञात होता है कि  उन दिनों राष्ट्रवादी मुसलमान कैसे दृढ़ संकल्प के साथ संप्रदायवाद से लड रहे थे।
डा० हाशिम किदवाई के पुत्र प्रोफेसर सलीम किदवाई ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए कहा कि इस पुस्तक की पाण्डुलिपि उनके पिता के अप्रकाशित संग्रह में पाई गई थी। इसके महत्व को देखते हुए उन्होंने सोचा कि इसका प्रकाशन आवश्यक है क्योंकि यह पुस्तक स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास के कई पहलुओं पर प्रकाश डालती है, यह पुस्तक स्वतंत्रता आंदोलन काल में एक देशभक्त मुस्लिम के संघर्ष की कहानी है।
राजनीति विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष तथा विभाग में डा० हाशिम किदवाई के कनिष्ठ सहयोगी प्रोफेसर शान मोहम्मद ने कहा कि अलीगढ़ में अपने शुरुआती दिनों से, जब भी कोई ज्ञात सम्बन्धी समस्या उत्पन्न होती थी तो वह डा० हाशिम किदवाई के साथ मिलकर इस मुद्दे को उठाते थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने डाक्टर हाशिम किदवाई और राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति पर उनकी पुस्तकों से बहुत कुछ सीखा जो आज भी दिल और दिमाग पर अंकित है।
इतिहास विभाग के प्रोफेसर अली नदीम रेजावी ने अपने बचपन की यादों का वर्णन करते हुए कहा कि वह अपने पिता के साथ एमएम हाल क्वार्टर में रहते थे और डाक्टर हाशिम किदवाई एमएम हॉल के प्रोवोस्ट थे। उन्होंने कहा कि डाक्टर  किदवाई हमेशा छात्र राजनीति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के समर्थक रहे हैं। इस आत्मकथा का अध्ययन करके युवा छात्र डाक्टर हाशिम किदवाई के जीवन से बहुत कुछ सीख सकते हैं।
कार्यक्रम में प्रोफेसर जकिया अतहर सिद्दीकी, प्रोफेसर एसएस शाह, प्रोफेसर एआर किदवाई, प्रोफेसर शाफे किदवाई, अब्दुल मोइज किदवाई, मेहर इलाही नदीम, डाक्टर राहत अबरार, प्रोफेसर मौलाबख्श और कई अन्य प्रतिष्ठित और प्रमुख हस्तियों ने भाग लिया।

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