उपभोक्ता परिषद ने किया बड़ा खुलासा कहा या कोई नई बात नहीं है वर्ष 2023 में एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड द्वारा 12 लाख स्मार्ट मीटर पर विवाद के बाद भारत सरकार ने टीम भेज कराया था सर्वेक्षण जो कमियां तब थी वही कमी आज भी ऐसे में करोड़ों अरबो की परियोजना पर सवाल
लखनऊ, दिनांक — उत्तर प्रदेश में लगभग 12 लाख प्रीपेड स्मार्ट मीटर ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (EESL) के माध्यम से सबसे पहले वर्ष 2019 से 22 के बीच लगाए गए जिस पर काफी विवाद हुआ उपभोक्ता परिषद ने मोर्चा खोल अंततः भारत सरकार के निर्देश पर वर्ष 2023 में भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा एक उच्च स्तरीय टीम को राज्य में जमीनी स्थिति का आकलन करने हेतु भेजा गया था। इस टीम ने विभिन्न डिस्कॉम क्षेत्रों का दौरा कर स्मार्ट मीटरिंग प्रणाली, बिलिंग व्यवस्था, उपभोक्ता अनुभव तथा तकनीकी कार्यप्रणाली की विस्तृत जांच की थी।जांच के दौरान कई गंभीर खामियां सामने आई थीं, जिसको भारत सरकार की तरफ से प्रबंध निदेशक पावर कारपोरेशन को दिनांक 25 सितंबर 2023 में भेजो गया था। चिंताजनक तथ्य यह है कि उस समय चिन्हित की गई वही समस्याएं एक बार फिर बड़े पैमाने पर सामने आ रही हैं, जो पूरे मामले को अत्यंत गंभीर बनाती है।
उत्तर प्रदेश राज विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व देश की सर्वोच्च ऊर्जा क्षेत्र की सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा वर्ष 2023 में भारत सरकार द्वारा जिन कर्मियों का खुलासा किया गया था यदि उससे सीख लेकर पावर कारपोरेशन ने वर्तमान आरएसएस के प्रोजेक्ट को तकनीकी और उपभोक्ता हित के मानकों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाया होता तो आज उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर परियोजना विवादों में ना आती निश्चित तौर पर जल्दबाजी में पूरे प्रोजेक्ट को चालू किया गया जो एक गंभीर मामला है और उपभोक्ताओं के साथ बड़ा खेल किया गया।
मुख्य रूप से वर्ष 2023 में जो कमियां सामने आई थी उन कमियां में और आज की कमियों में पूरी तरह समानता है सामने आई खामियां इस प्रकार हैं:
उसे समय एक प्रीपेड उपभोक्ता के मामले में भारत सरकार ने कहा था कि तीन दिन तक भुगतान करने के बाद भी उसका कनेक्शन नहीं जुड़ पाया था। जिससे उपभोक्ता की स्वत प्रीपेड व्यवस्था से मन खिन्न हो गया था
MDM और बिलिंग सिस्टम का एकीकरण लंबित: छह माह से अधिक समय तक एकीकरण न होने के कारण बिलिंग में मैनुअल हस्तक्षेप हो रहा है, जिससे स्मार्ट मीटरिंग का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
SMS अलर्ट सेवा बाधित: 3–6 महीनों तक उपभोक्ताओं को सूचना न मिलना, जिससे असुविधा बढ़ी।
चेक मीटर स्थापना में अनियमितता: मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं, साथ ही उपभोक्ताओं से शुल्क वसूला जाना।
SOP का अभाव: स्मार्ट मीटर और चेक मीटर के रीडिंग अंतर के समाधान हेतु कोई स्पष्ट प्रक्रिया नहीं।
अत्यधिक डिमांड पेनल्टी: उपभोक्ताओं पर नियमों के विरुद्ध अतिरिक्त भार डाला जा रहा है।
लो बैलेंस अलर्ट फीचर का अभाव: मोबाइल ऐप में महत्वपूर्ण सुविधा उपलब्ध नहीं।
नेटवर्क व कनेक्टिविटी समस्याएं: मीटर संचार में बाधा, जिससे डिस्कनेक्शन/रीकनेक्शन प्रभावित हो रहा है।
ऊर्जा मंत्रालय ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा था कि स्मार्ट मीटर लगाने के बाद भी यदि मूलभूत कार्यों के लिए मैनुअल हस्तक्षेप आवश्यक हो, तो यह पूरी परियोजना के उद्देश्य को विफल करता है और उपभोक्ताओं के विश्वास को कमजोर करता है।
वर्तमान में इन्हीं खामियों का पुनः उभरना यह संकेत देता है कि सुधारात्मक कदम या तो प्रभावी रूप से लागू नहीं किए गए या निगरानी में गंभीर कमी रही है। यह स्थिति न केवल उपभोक्ताओं के हितों के विरुद्ध है, बल्कि स्मार्ट मीटर परियोजना की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है।
अवधेश कुमार वर्मा प्रतिनिधि: उपभोक्ता परिषद

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