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अमेरिकी ‘ख़ुफ़िया विभाग’ ने कहा था कि ईरान के एक तिहाई ड्रोन और मिसाइलें बर्बाद हो गए

#WAR। CIA ने हाथ खड़े कर दिए हैं. वह रोज़ाना किसी न किसी न्यूज़ एजेंसी के ज़रिए ऐसी ख़बरें प्लांट करवा रहा है, जिनसे ट्रंप-हेगसेथ झूठा नज़र आएं. इससे ज़्यादा उसका और कोई मक़सद नहीं है, क्योंकि CIA कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं करा रही है. अलबत्ता उसके बयान अपने-आप में तुक्केबाज़ी की तरह नज़र आते हैं.

मसलन, दो-चार दिन पहले अमेरिकी ‘ख़ुफ़िया विभाग’ ने कहा था कि ईरान के एक तिहाई ड्रोन और मिसाइलें बर्बाद हो गई हैं, एक तिहाई मिसाइलें या तो डैमेज हैं या फ़िलहाल अंडरग्राउंड जगहों पर पड़ी हुई हैं जिनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा. यानी कुल मिलाकर ईरान के पास एक तिहाई ड्रोन-मिसाइलें ही उपलब्ध हैं.

अब, कल इसी ख़ुफ़िया अधिकारियों ने कहा कि ईरान के पास अभी भी 50 फ़ीसदी ड्रोन उपलब्ध हैं. मिसाइल लॉन्चर के बारे में भी उसकी यही राय है. 

यानी लगातार हफ़्ते भर भी ये लोग एक बयान पर टिक नहीं पाए. ये बयान, ट्रंप-हेगसेथ-विटकॉफ़-कुशनर जैसे सनकी हाथियों के कुनबे पर दबाब बनाने की कोशिश है कि युद्ध में मत फंसो. 

ट्रंप की हालत देखिए. वह रोज़ कहता है कि जीत रहे हैं. फिर सांस लेने से पहले ही अपने जनरल को बर्ख़ास्त भी कर देता है. जीतता हुआ देश अपने जनरलों को मेडल देता है, ये आदमी इस्तीफ़ा दिलवा रहा है. 

अमेरिका ने अब तक इसे आधिकारिक तौर पर ‘युद्ध’ करार नहीं दिया है, वह इसे ‘लिमिटेड मिलिट्री ऑपरेशन’ मान रहा है, लेकिन अब पेंच फंस रहा है. कुछ गवर्नर ने कहना शुरू कर दिया है कि अगर अमेरिकी कांग्रेस से फ़ंड चाहिए, तो पहले यह पारित करवाओ कि यह युद्ध है. 

इस बीच, ट्रंप ने 2027 में रक्षा बजट को 1.5 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने की बात कही है. अगर इसे मंज़ूरी मिलती है, तो रक्षा बजट में साल भर में 40% की बढ़ोतरी होगी. यह अमेरिकी इतिहास में दूसरे विश्वयुद्ध के बाद की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है.

इस प्रस्ताव से ही पता चल रहा है कि हार का स्वाद चखने के बाद अपनी कमज़ोरियों को ढंकने की कोशिश की जा रही है. दूसरे विश्वयुद्ध के बाद से अब तक दुनिया पर जारी अमेरिकी दबदबे को अकेले ईरान ने ध्वस्त करके रख दिया है. सैन्य ऑपरेशन के फ़्रंट पर, रणनीतिक फ़्रंट पर, नैरेटिव के फ़्रंट पर और आर्थिक फ़्रंट पर.

CIA अब सिर्फ़ सरकारी आदेश मान रही है. मजबूरी है. कल को ट्रंप कहेगा कि समंदर में कूदो, तो कूदना पड़ेगा, लेकिन उसे पहले हफ़्ते में ही पता चल गया था कि युद्ध में ईरान भारी है.
सोर्स : FB 

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