इज़रायल को अपनी ताक़त पर ओवर-कॉन्फ़िडेंस था,उसे लगा था कि ईरान को उसने तोड़ दिया

अमेरिका तो दूर बैठा है. ज़्यादा से ज़्यादा पश्चिम एशिया में भेजे गए उसके सभी संसाधन नेस्तनाबूद हो जाएंगे, लेकिन इज़रायल का क्या होगा? युद्ध उसी का शुरू किया हुआ है. 

28 फ़रवरी को जब इज़रायल-अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था, तो नेतान्याहू ने कहा था कि यह 40 साल का सपना है, जो पूरा हो रहा है. खामनेई की हत्या के बाद इज़रायली ख़ेमे में जश्न था.

अमेरिका के उलट वहां की आबादी का प्रभुत्वशाली तबक़ा तो पागलों की तरह युद्ध के समर्थन में था. यहूदी-इज़रायलियों का 81-93 फ़ीसदी हिस्सा युद्ध चाह रहा था. 

इज़रायल को अपनी ताक़त पर ओवर-कॉन्फ़िडेंस था. उसे लगा था कि ईरान को उसने तोड़ दिया, तो लेबनान के आधे हिस्से पर भी वह कब्ज़ा कर लेगा. 

ग्रेटर इज़रायल के मिशन के तहत उसने फ़िलिस्तीन के बड़े हिस्से को बीते 70 वर्षों में अमानवीय तरीक़े से हथिया लिया. गज़ा से लेकर वेस्ट बैंक तक उसने सिर्फ़ और सिर्फ़ दमन के सहारे कब्ज़ा किया हुआ है. वह सीरिया में घुस गया, लेबनान में घुस गया, लेकिन उसे 'नील से लेकर फरात' तक फैलना था!

गज़ा जनसंहार को कवर करने के लिए बीते 3 साल से दुनिया के किसी मीडिया को वहां जाने की इज़ाज़त नहीं है. वहां सिर्फ़ इज़रायली सेना का पिट्ठू इज़रायली मीडिया ही जा सकता है. 

इज़रायल में मीडिया कवरेज का कार्ड जारी करने वाले सेना के प्रेस ऑफ़िस (मीडिया ऑफ़िस) का दूसरा नाम सेंसरशिप ऑफ़िस है. मज़ाक़ में नहीं कह रहा, आधिकारिक है.

वह दुनिया का सबसे नस्लभेदी देश है, जहां यहूदियों के अलावा बाक़ी सबको सिर्फ़ काग़ज़ पर ही अधिकार है. इसे ऐसे समझिए कि वहां युद्ध के समय नागरिकों को सुरक्षित पनाह देने के लिए सरकार ने 11,350 से ज़्यादा बंकर बनाए हुए हैं, लेकिन फ़िलिस्तीनी और अरबी इलाक़ों में मात्र 37 बंकर हैं.

उनकी जान की इस यहूदी स्टेट को कोई फ़िक़्र नहीं है. तो 40 साल के सपनों और दशकों की तैयारी का रेतीला महल ईरान ने पल भर में ढहा दिया. 

अब ईरान-हिज़बुल्लाह के ताल-मेल भरे हमलों को ज़रा भी नहीं रोक पा रहा. जहां मिसाइल गिरनी होती है, गिर रही है. कोई डिफ़ेंस नहीं है. कोई सैन्य औकात नहीं रह गई है. इतने समय तक इज़रायल ने दुनिया को भरमाकर रखा कि वह कोई बड़ी सैन्य ताक़त है.

इतने समय से वह लगातार तैयारी कर रहा था. मिसाइल से लेकर रडार तक, इंटरसैप्टर से लेकर बंकर तक बनाने के बाद, वहां के जनरलों ने काफ़ी सोच-समझकर ही ईरान पर हमला किया होगा. 

हुआ क्या? हुआ यह है कि इज़रायली सैन्य ताक़त पूरी तरह बिखर गई है और ईरान अगर चाहे, तो वह पूरा देश मिटा सकता है. इज़रायल कुछ नहीं कर पाएगा और न ही अमेरिका. लेकिन अब तक ईरान ने यही कहा है कि वह नागरिक ठिकानों पर आगे बढ़कर हमले नहीं करेगा. 

इज़रायल की ताक़त की कहानी इस युद्ध के बाद ख़त्म हो जाएगी. नोएडा में बैठे टीवी ऐंकर क्या करेंगे उसके बाद?
साभार: FB

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