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अमेरिका-इज़रायल हमले नहीं करता, तो जो होर्मुज कभी बंद ही नहीं होता

अमेरिका के लिए अब युद्ध का समूचा लक्ष्य बदल गया है. अब तक किए गए सभी प्राथमिक दावे हवा फांक रहे हैं. अब उसकी समूची ताक़त होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने में जुटी है. अगर अमेरिका-इज़रायल हमले नहीं करता, तो जो होर्मुज कभी बंद ही नहीं होता, उसी को खोलना अब अमेरिका का लक्ष्य बन गया है. इससे बड़ी हार क्या होगी!

अमेरिका की पिछली सभी धमकियां इसी होर्मुज को खोलने के इर्द-गिर्द घूम रही हैं. अमेरिका यहां सैन्य टुकड़ियां भेज रहा है. अगर वह सचमुच ऐसा करता है, तो यह उसके लिए आत्मघाती साबित होगा. चाहे वह होर्मुज में रहे चाहे ख़ार्ग़ द्वीप पर.

क्यों?

क्योंकि वह ज़माना लद गया जब पैदल सैन्य टुकड़ियां किसी नई जगह पर उतरकर उस पर कब्ज़ा कर लेती थीं. अब, जब तक आसमान सुरक्षित न हो, पैदल टुकड़ियां कुछ नहीं कर सकतीं. आसमान पर ईरान का कब्ज़ा है. ऐसे में अमेरिकी सैनिकों को भारी नुक़सान पहुंच सकता है. 

दूसरा, अब यह भी मुमकिन नहीं है कि इंस्टॉलमेंट में आप सैनिक भेजे और उम्मीद करे कि वह आगे बढ़ते रहेंगे. इस तरीक़े में पीयर ग्रुप के पास आपके ऊपर क़ाबू पाने का विकल्प ज़्यादा आसान और मज़बूत हो जाता है. अमेरिका के लिए यह मुमकिन नहीं है कि वह 2-3 लाख सैनिक एक साथ ईरान की सीमा पर उतार दे. नामुमकिन है. 

वह 4-6 हज़ार सेना की टुकड़ियों के साथ ईरान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है!

इसलिए, मेरे हिसाब से सैन्य टुकड़ियों वाली बात भी ट्रंप का छोड़ा हुआ सुर्रा साबित होगी और अगर वह ज़िद करता है, तो भीषण रक्त-पात होगा. वजह सिंपल है. ईरान के ग़ैर-सैन्य लड़ाके अमेरिकी सेना से टकराने को उतावले हैं और वे सरकार से कह रहे हैं कि पहले हमें भेजो. ईरान अपनी सीमा के भीतर अमेरिका से सैकड़ों गुना ज़्यादा मज़बूत है. 

सबसे बड़ी बात कि ईरान को अब ख़ार्ग़ की बर्बादी की भी फ़िक्र नहीं है. ईरान कह रहा है कि तुम बर्बाद करोगे, तो हम ख़ुद ही समूचे ख़ार्ग़ पर कारपेट बॉमिंग करेंगे और अगर तुम्हारे सैनिक वहां रहें, तो सब ख़ार्ग़ में ज़मींदोज़ हो जाएंगे. 

इस युद्ध के अब तक के रिकॉर्ड को देखते हुए ईरान की बात को गंभीरता से लेना चाहिए.
साभार:FB 
Dilip khan

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