सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपनी बात रखिए. अगर वहां कुछ नहीं होता है तो आप मेरे पास आ सकती हैं।

 

          मथुरा जवाहर बाग कांड: 

याचिककर्ता ने कहा कि जून-2016 के जवाहर बाग कांड में काफी निर्दयता से मेरे पति की हत्या कर दी गई थी. लेकिन अब तक सीबीआई की तरफ से कुछ नहीं किया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इलाहाबाद HC जाने को कहा (फाइल फोटो)सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इलाहाबाद HC जाने को कहा (फाइल फ़ोटो)
नई दिल्ली / मथुरा के जवाहर बाग हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से इलाहाबाद हाई कोर्ट जाने को कहा है. दरअसल जून-2016 में जवाहर बाग में अतिक्रमण हटाने के दौरान एसपी मुकुल द्विवेदी, फरह के दारोगा संतोष यादव सहित 30 लोगों की हत्या कर दी गई थी. इस मामले में चार साल बीत जाने के बाद भी निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई है. इसलिए याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से जवाहर बाग कांड की जांच कराने की मांग की थी।

याचिककर्ता ने कहा कि जून-2016 के जवाहर बाग कांड में काफी निर्दयता से मेरे पति की हत्या कर दी गई थी. लेकिन अब तक सीबीआई की तरफ से कुछ नहीं किया गया. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आप इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपनी बात रखिए. अगर वहां कुछ नहीं होता है तो आप मेरे पास आ सकती हैं।

जिसके बाद याचिकाकर्ता ने दिल्ली HC में याचिका दाखिल कराने की मांग की. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह मांग भी अस्वीकार कर दिया. जिसके बाद वह याचिका वापस ले ली गई।

मुकुल द्विवेदी की पत्नी ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इस पूरी साजिश की दो स्तरीय जांच कराने की गुहार लगाई थी. पहला तो ये पता करना कि आखिर ये कब्जा कैसे चल रहा था और इतने हथियारों का जखीरा और पूरी साजिश रचने वाले और अंजाम देने वालों में कौन-कौन शामिल रहे हैं ।

याचिका में अपील की गई थी कि सीबीआई दो महीनों में जांच कर रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दे. क्योंकि सीबीआई ने अबतक मुख्य अभियुक्त रामवृक्ष यादव और उसके साथियों के खिलाफ पिछले 40 महीनों से जारी जांच के दौरान 82 से ज्यादा खुफिया रिपोर्टों का हवाला तो दिया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया।

याचिका में गुहार लगाई गई है कि सीबीआई को आदेश दिया जाए कि समुचित संख्या में अधिकारियों की टीम बनाकर इस संवेदनशील मामले की जांच पूरी कर दो महीने में रिपोर्ट कोर्ट को सौंप दें. साथ ही सीबीआई एक और टीम बनाकर राज्य सरकार की निष्क्रियता की भी जांच कराए कि आखिर किनको बचाने के लिए ये जतन किए गए? राज्य सरकार सीबीआई को घटना से संबंधित दस्तावेज और अन्य सूचनाएं मुहैया कराए और जांच में पूरा सहयोग करे ।

याचिका में आशंका जाहिर करते हुए कहा गया था कि मुख्य अभियुक्त रामवृक्ष यादव के मारे जाने को लेकर भी सीबीआई किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है. मुमकिन है कि उसे किसी सुरक्षित जगह पहुंचा दिया गया हो जहां वो अब भी सुरक्षित हो। copy:- आजतक

हो. 

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