ट्रंप झूठ बोलने, दग़ाबाज़ी करने, हमला करने का मास्टर रहा

अमेरिका। 25-26 साल पहले जब कोसोवो का युद्ध हुआ था, तब भी अमेरिका रोज़ यह हल्ला मचाता था कि उसने सैकड़ों टैंक नष्ट कर दिए. युद्ध के बाद पता चला कि कुल मिलाकर सिर्फ़ 14 टैंक ही अमेरिका उड़ा पाया है. बड़बोलापन अकेले ट्रंप की बीमारी नहीं है. यह रोग अमेरिका के लिए पुराना है.

वह झूठ बोलने, दग़ाबाज़ी करने, हमला करने का मास्टर रहा है. अभी अमेरिका रोज़ यह ख़बरें चलवाता है कि उसके सैनिक खाड़ी के क़रीब पहुंचने वाले हैं या पहुंच गए है. 

यहां तक तो ठीक है, लेकिन पहुंचकर करेंगे क्या, यह किसी को नहीं पता है. 

2. ईरान ने इस संघर्ष को सैन्य नहीं, बल्कि भू-आर्थिक युद्ध में बदल दिया है. अमेरिका समेत पूरी दुनिया के लिए यह एक नई क़िस्म की चुनौती है. हमला से पहले, अमेरिका ने कुंजी भी नहीं पढ़ी थी. परीक्षा में सिलेबस से बाहर की चीज़ें आ गईं.

3. इज़रायल एक सामान्य देश नहीं है, बल्कि यह एक ‘सैटलर कॉलोनी’ है. इसने अपनी सीमा का विस्तार करके उपनिवेश बनाया हुआ है. यहूदी एथनोस्टेट के रूप बने रहने के लिए इज़रायल को लगातार जनसांख्यिकीय इंजनीयिरिंग यानी डेमोग्राफ़िकल इंजनीयिरिंग करनी पड़ती है. जातीय सफ़ाई करना इसके मूल में है. तुर्रा यह कि वह ख़ुद इसे अपने अस्तित्व के लिए ज़रूरी बताकर अपने लोगों को कनविंस करता रहता है.
सोर्स:FB
Dilip khan 

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