ईरान ने पहले से एलान करके खाड़ी देशों की गैस फ़ील्ड को निशाना बनाया

ईरान । कल युद्ध एक नए मुक़ाम पर पहुंच गया. ईरान के दक्षिणी पार्स गैस फ़ील्ड पर इज़रायली हमले के जवाब में ईरान ने पहले से एलान करके खाड़ी देशों की गैस फ़ील्ड को निशाना बनाया. उसने क़तर की रास लफ़ान फ़ील्ड, UAE की हबशान और बाब गैस फ़ील्ड और सऊदी के पूर्वी इलाक़ों में मौजूद गैस फ़ील्ड पर हमले किए.

प्रलय है!

जब तेहरान की तेल रिफ़ाइनरी पर इज़रायल ने हमला किया था, तभी दुनिया के सामने ईरान ने यह साफ़ कर दिया था कि अगर उसकी तेल और गैस फ़ैसिलिटी पर हमला होता है, तो वह भी जवाबी कार्रवाई करेगा. दुनिया की सबसे बड़ी गैस फ़ील्ड साउद पार्स पर हमले के बाद ईरान ने यह दिखा दिया कि उसके कहे तो गंभीरता से लिया जाए.

ट्रंप का फिर से फ़्लावर हो गया. हमले के बाद उसने कहा कि इज़रायल ने उसे बिना बताए ईरानी गैस फ़ील्ड पर हमला किया था और उसे इसका कोई अंदाज़ा नहीं था. उसने लगभग गारंटी के लहज़े में कहा है कि इज़रायल आगे से ऐसा नहीं करेगा. फिर, उसने कहा कि अगर ईरान, क़तर की गैस फ़ील्ड पर और हमले करता है, तो अमेरिका साउद पर्ल को तबाह कर देगा. 

ईरान ने साफ़ कर दिया था कि जिन-जिन रिफ़ाइनरी और गैस फ़ील्ड में अमेरिका का पैसा लगा है या जहां उसका हित जुड़ा है, उन सबको वह निशाना बनाएगा. कल उसके हमले को कोई रोक नहीं पाया.

इसी आशंकाओं के मद्देनज़र मैंने पहले कहा था कि अमेरिका और इज़रायल, ईरान के ऊर्जा केंद्रों पर हमले नहीं करेगा. लेकिन इज़रायल ने ऐसा किया और अब अमेरिका की ही नींद उड़ी हुई है. वह एक साथ इज़रायल को भी डांट रहा है और ईरान को भी धमका रहा है.

यह दुनिया के लिए तबाही है. पश्चिमी देश तो फिर भी तेल-गैस का इंतज़ाम कर लेंगे, क्योंकि उनकी आपूर्ति और भी जगहों से होती है. सबसे ज़्यादा मुश्किलें बढ़ेंगी भारत समेत एशियाई देशों के लिए. 

कल तेल अवीव में भी ईरान ने कई हमले किए. उसका निशाना इज़रायली न्यूक्लियर फ़ैसिलिटी है, क्योंकि ईरान ने दावा किया कि उसकी न्यूक्लियर फ़ैसिलिटी को अमेरिका-इज़रायल ने निशाना बनाया है. 

उधर अमेरिका में इस युद्ध के ख़िलाफ़ माहौल और गंभीर होता जा रहा है, जो कैंट के इस्तीफ़े बाद जो चीज़ें अब तक अंदर थीं, वे सतह पर आ गई हैं. MAGA में फूट पड़ गई है. दुनिया के सामने अमेरिका की साख चकनाचूर हो गई है. ट्रंप को उसी के क़रीबी व्यक्ति ने नंगा कर दिया.

अब वॉशिंगटन पोस्ट की ख़बर है कि अमेरिका ने इस युद्ध के लिए तक़रीबन 17 लाख करोड़ रुपये का बजट बनाने की सोच रहा है. इस पर वहां खलबली मची हुई है कि इज़रायल के युद्ध में तुम क्यों पैसे ख़र्च कर रहे हो, यह तुम्हारा युद्ध है ही नहीं. 

अमेरिका दलदल में उतर गया है और जितना हाथ-पैर मार रहा है उतना नीचे धंसता जा रहा है. बिना कुछ अपमानजनक शर्तों को माने बग़ैर ईरान इन दोनों देशों को छोड़ने वाला नहीं है. सोशल मीडिया के अमेरिका-इज़रायल प्रेमी लोग भले ही ईरान पर हुए हमलों की फ़ोटो लगाकर रोज़ दावा करते रहें कि ईरान हार रहा है, लेकिन दुनिया के तमाम हलकों में तीसरे दिन से ही यह चर्चा चल रही है कि अमेरिका-इज़रायल युद्ध हार गया है. इस हार को बस स्वीकार करने में देरी हो रही है.
साभार : FB 

Post a Comment

0 Comments