अमेरिका और इज़रायल शुरू से ही लगातार यह नैरेटिव चला रहे हैं कि ईरान का जख़ीरा ख़त्म हो गया. लोगों को देखना चाहिए कि ईरान किस इंटेंसिटी से पिछले एक हफ़्ते से हमले कर रहा है और किस तरह इज़रायल अब उसकी तक़रीबन एक भी मिसाइल रोक नहीं पा रहा.
शुरुआत में ईरान ने अमेरिका-इज़रायल के एयर डिफ़ेंस सिस्टम को बर्बाद करने के लिए ही पुरानी मिसाइलों से थोक हमले किए थे. उसे पता था कि इसमें उसकी मिसाइलें बर्बाद होंगी. हुई भी, लेकिन इन दोनों देशों का एयर डिफ़ेंस पूरी तरह बर्बाद हो गया.
उसने चार-पांच दिनों के बाद आधुनिक और उन्नत मिसाइलें निकालनी शुरू कीं. अब वह 5 अलग-अलग तरह की मिसाइलें दाग़ रहा है जिनका पैटर्न अलग है, जिनकी स्पीड अलग है, जिनका प्रोजेक्शन अलग है और जिनके हमले करने के तरीक़े अलग हैं.
अब आलम यह है कि ईरान अगर हाथ से भी कोई गोला फेंककर इज़रायल को मारे, तो वह उसे रोक नहीं पाएगा.
बहरीन में अमेरिका का फ़िफ़्थ फ़्लीट पूरी तरह बेअसर हो गया है. सेंट्रल कमांड ही हालत पस्त है. UAE समेत बाक़ी खाड़ी देशों में बची-खुची जगहों पर ईरान पहले से एलान कर-करके हमले कर रहा है. वह ट्वीट करके सामान्य नागरिकों को आगाह कर दे रहा है कि फलाने इलाक़े पर हमला करेंगे, वहां मत जाना और उसके बाद ड्रोन दाग़ दे रहा है.
ईरान ने ये सब पिछले एक साल में शीर्ष नेतृत्व समेत टॉप के तीन दर्जन नेता, अफ़सर, जनरल गंवाने के बावजूद किया है. उसने सॉलिड सिस्टम तैयार किया है, जिसके पास लड़ने की लंबी प्लानिंग है.
नेतन्याहू समेत इज़रायली रक्षा मंत्री ने कहा था कि उन्होंने 40 और 47 साल से ईरान पर हमले करने का ख़्वाब देखा था, अब उनके लिए यह दु:स्वप्न साबित हो रहा है.
पहली बार इज़रायल में अमेरिका और अमेरिका में इज़रायल के ख़िलाफ़ विरोध के स्वर उठ रहे हैं. अमेरिका में इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि उसे लगता है कि इज़रायल ने अमेरिका को बेवजह युद्ध में घसीटा. इज़रायल में इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि उसे लगता है कि अमेरिका उसकी सही से मदद नहीं कर रहा.
दोनों की पतलून फटी हुई है और दोनों चाह रहे हैं कि सामने वाला आकर उसकी रफू कर दे.
साभार: FB

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