ईरान मुआवज़े और होर्मोज पर अपनी कोर डिमांड्स से पीछे हटेगा इसकी उम्मीद कम है, अमरीका इसे मानेगा इसकी उम्मीद भी कम है। मुआवज़े की रसीद तो शेखों पर कट सकती है लेकिन होर्मुज का नियंत्रण देने पर शेखों और अमरीका, दोनों की शेखी खत्म हो जाएगी।
आज न्यूयार्क टाइम्स की ख़बर है कि सऊदी क्राउन प्रिंस ईरान पर हमला जारी रखने के लिए अमरीका पर प्रेशर बना रहे हैं। उड़ती ख़बर यह है कि कुवैत से मिसाइलें चली हैं। यूएई के लीडरान तो ईरान को आतंकवादी कह ही रहे हैं। तो मुमकिन है अगले दौर में अरब लीडरान इस जंग में सीधे शामिल हो जाएँ।
सुबह वाले हमले खतरनाक थे और तेल अवीव का तेल निकल गया है, तो नेतन्याहू आज की रात बड़े हमले कर सकता है, ईरान भी जवाब देगा ही। अमरीकी मरीन पहुँच रहे हैं, पैराट्रूपर भी। कोई योजना पीछे नहीं खिसकाई गई है सिवाय पॉवर स्ट्रक्चर पर हमले के।
मोदी जी के संसद में बयान या ट्रम्प के फोन का फ़िलहाल तो कोई खास मतलब है नहीं... बाक़ी देखते हैं।
साभार: FB
वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार पांडे

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