ट्रंप और हेगसेथ अब बीच-बीच में ईरान को नुक़सान पहुंचाने की बात को अपनी जीत बताते फिरते हैं, ताकि मिड-टर्म इलेक्शन में माइलेज ले सके. कल ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया को गरियाया कि वह ईरान से मैन्युपुलेट हो रहा है! दुनिया भर में नैरेटिव बिल्डिंग का प्रोजेक्ट चलाने वाले अमेरिका को कहीं से भी कोई सपोर्ट नहीं मिल रहा.
जीत-जीत का जाप करते-करते ट्रंप गुट अचानक युद्ध को और तेज़ करने की बात भी करने लगता है. हताश होकर जापान, कोरिया और फ्रांस से ट्रंप ने होर्मुज में युद्ध पोत भेजने की गुहार लगाई थी, जिसे इन तीनों ने ठुकरा दिया.
अब वह नाटो को ‘बुरे अंजाम’ की धमकी दे रहा है. कह रहा है कि अमेरिका के लिए युद्ध लड़ो. ऐसी हताशा किसी जीते हुए देश की नहीं होती.
वह रोज़ हार रहा है.
सच्चाई यही है कि दूसरे विश्वयुद्ध के बार अमेरिका एक भी युद्ध नहीं जीत पाया है. कोरिया में सिर्फ़ युद्ध विराम हुआ था. वियतनाम में अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा था.
अफ़ग़ानिस्तान, इराक़ से लेकर लीबिया तक इसने सिर्फ़ विनाश किया, लेकिन मक़सद पूरा नहीं हो पाया. देश को बर्बाद करना जीत नहीं होती.
दूसरा विश्वयुद्ध भी सोवियत संघ की वजह से जीता. वरना, अमेरिका को जब कुछ समझ में नहीं आया, तो उसने जापान के ऊपर सीधा परमाणु बम गिरा दिया था.
1990 के दशक से वुल्फ़ोवित्ज़ डॉक्ट्रीन पर विदेश नीति चलाने वाला अमेरिका इस बार ईरान में बुरी तरह फंस गया है. इस डॉक्ट्रीन में कहा गया था कि अमेरिका को पूरी दुनिया में अपना वर्चस्व बनाना है और जहां भी कोई क्षेत्रीय ताक़त उभरती हुई दिखे, उसे कुचलना है.
ईरान में बात बन रही पा रही. इज़रायल के लिए अब अस्तित्व बचाने का मामला बन गया है. अमेरिका मदद के लिए तड़प रहा है. रोज़ उसके ठिकानों पर हमले हो रहे हैं. होर्मुज खुलवाने की तमाम क़वायद अब तक थोथी साबित हुई है.
ईरान ने अब अपने जख़ीरे से हज़ार, दो हज़ार किलो वाले वॉरहेड निकाल लिए हैं. पहले से उन्नत मिसाइलें, उन्नत ड्रोन और उन्नत तकनीक से अब वह हमले कर रहा है.
इराक़ से लेकर यूएई तक अमेरिकी ठिकानों और ऐसेट पर हमले और बढ़ गए हैं. ईरान इस युद्ध में भी आगे बढ़कर सिविलियन इलाक़ों पर हमले नहीं कर रहा, लेकिन अमेरिकी संरचनाओं को वह बख़्श भी नहीं रहा.
बहुत मुमकिन है कि आने वाले दिनों में वह जिबूती तक अपने हमलों का दायरा बढ़ाए, क्योंकि रणनीतिक तौर पर वह काफ़ी अहम है. दूसरा, चीन वहां एकतरफ़ा दबदबा चाहता है, तो वह ईरान को बैक करेगा.
साभार : FB

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